होम / सामाजिक गतिविधियां / "चीनी हुई कड़वी, भाजपा की लचर आर्थिक नीतियों ने आम आदमी की मिठास छीनी" :वोरा
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दुर्ग। देश में त्योहारों के समय में लगातार बढ़ती महँगाई को लेकर दुर्ग शहर के पूर्व विधायक एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण वोरा ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है।अप्रत्याशित रूप से बढ़ रहे चीनी के दामों को उन्होंने ई 20 पेट्रोल से जोड़ते हुए सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने अपनी विकलांग आर्थिक नीति का नमूना पेश किया है। महज 20 दिनों में चीनी 20 रुपये प्रति किलो महंगी हो गई है। पिछले एक साल में चीनी के खुदरा मूल्य में करीब 53% की वृद्धि हो गई है। ई20 को अनिवार्य करने के फैसले से भी लोगों का खर्च बढ़ रहा है। वाहनों की माइलेज कम होने के कारण लोगों को अपनी दूरी तय करने के लिए ज्यादा पेट्रोल भरवाना पड़ रहा है। इससे उनका मासिक बजट बढ़ गया है। ई20 से होने वाले संभावित नुकसान से बचने के लिए कई लोग प्रीमियम पेट्रोल भरवा रहे हैं, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, वाहनों की माइलेज भी प्रभावित हो रही है।आम वाहन मालिक 15 से 20 प्रतिशत तक माइलेज कम होने की शिकायत कर रहे हैं।दोपहिया वाहनों की स्थिति तो और भी खराब बताई जा रही है। लोग कार्बोरेटर में कचरा फंसने और वाहन संबंधी दूसरी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं।
हर रोज महंगाई का नया-नया हमला जनता की जेब पर हो रहा है।जो गन्ना उत्पादन हो रहा है, इथेनॉल बनाने में खपने लगा है। इसके कारण भारत की चीनी उपलब्धता और निर्यात क्षमता पर भी असर पड़ रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो भारत अगले तीन वर्षों तक चीनी निर्यात करने की स्थिति में नहीं होगा। हमारा भारत देश विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक था,सरकार ने अब 10 लाख टन चीनी के आयात का फैसला किया है। सवाल यह है कि जो देश कभी दुनिया के प्रमुख चीनी निर्यातकों में शामिल था, उसे आज चीनी आयात करने की नौबत क्यों आ गई?
25 लाख टन चीनी के उत्पादन के बराबर गन्ना इथेनॉल में चला गया और इसका असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर दिखाई दे रहा है। इसका असर केवल चीनी तक सीमित नहीं है, बल्कि दूध जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम भी करीब 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। सबसे दुर्भाग्यजनक बात तो यह है कि गन्ने की बढ़ती डिमांड का फ़ायदा भी किसान भाइयों को नहीं मिल पा रहा है ।केंद्र सरकार के मंत्रालयों में कोई सामंजस्य नजर नहीं आ रहा। रोजमर्रा की वस्तुओं की लगातार बढ़ती कीमतें देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा कि भाजपा सरकार ने देश के जनमानस के जेब में दर्जनों छेद कर दिए हैं। ऐसा कोई वर्ग नहीं जिसपर केंद्र की लाचार आर्थिक नीतियों का दुष्प्रभाव नहीं पड़ रहा हो। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी। विदेशी मुद्रा कितनी बच रही है, ना विदेशी मुद्रा बचाने की जुगत में कोई दम है और पेट्रोल के दाम तो जस के तस हैं। त्योहारों के मौसम में चीनी, प्याज सब्जियों सहित हर जरूरत के सामान का महंगा होना इस सरकार के जाने का पुख्ता प्रमाण है। अगर स्थिति सुधार की दिशा में सरकार ने तत्काल कोई कदम ना उठाया तो कांग्रेस पार्टी जनभावना के अनुरूप बड़ा आंदोलन करेगी।
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