होम / सामाजिक गतिविधियां / विकसित भारत-जी राम जी योजना से रोजगार, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास को मिली नई गति
सामाजिक गतिविधियां
दुर्ग। कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत दुर्ग जिले में ग्रामीण रोजगार के साथ जल संरक्षण, स्वच्छता और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति मिली है। 1 जुलाई 2026 से लागू नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी दी जा रही है। योजना में मजदूरों को समय पर मजदूरी उपलब्ध कराने के साथ ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनका लाभ ग्रामीणों को लंबे समय तक मिल सके।
SNA से ₹112.74 लाख मजदूरी का भुगतान
योजना के तहत जिले में सिंगल नोडल अकाउंट (SNA) के माध्यम से मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया गया है। जनपद पंचायत पाटन में ₹23.81 लाख, धमधा में ₹38.76 लाख और दुर्ग में ₹50.17 लाख, इस प्रकार कुल ₹112.74 लाख की मजदूरी राशि का भुगतान किया जा चुका है। मजदूरों को पारदर्शी एवं सुविधाजनक भुगतान सुनिश्चित करने के लिए राशि सीधे उनके बैंक अथवा डाकघर खातों में DBT के माध्यम से भेजी जा रही है।
587 निर्माण कार्यों को मिली प्रशासनिक स्वीकृति
योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। योजना लागू होने के बाद जिले में कुल 587 निर्माण कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें जनपद पंचायत दुर्ग के 118, धमधा के 227 और पाटन के 242 कार्य शामिल हैं।
स्वीकृत कार्यों में 77 तालाब गहरीकरण, 40 नाली निर्माण, 45 नाला पुनरुद्धार, 5 असफल नलकूपों की रिचार्जिंग तथा 17 ट्रेंच निर्माण सहित जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े कार्य शामिल हैं।
इन कार्यों का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराने के साथ गांवों में ऐसी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है, जो आने वाले वर्षों में जल संरक्षण, आजीविका संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में उपयोगी साबित हों।
1 जुलाई से अब तक 44,658 मानव दिवसों का सृजन
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी मिलेगी। पूर्व व्यवस्था में यह सीमा 100 दिन थी। ग्रामीण परिवार ग्राम पंचायत के माध्यम से रोजगार की मांग कर सकते हैं तथा मांग के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 2026 से अब तक जिले में 44,658 मानव दिवसों का सृजन किया जा चुका है। इस अवधि में SNA के माध्यम से ₹102.61 लाख मजदूरी राशि का भुगतान किया गया है। मजदूरी भुगतान निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायत से जिला स्तर तक लगातार निगरानी की जा रही है।
29 स्कूलों में बनेंगे बालिका शौचालय
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता सुविधाओं के विस्तार और बालिकाओं के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल की गई है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 एवं विकसित भारत-जी राम जी योजना के अभिसरण से जिले के 29 शासकीय विद्यालयों में नवीन बालिका शौचालयों का निर्माण किया जाएगा।
इसके लिए कुल ₹126.73 लाख की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। जनपद पंचायत दुर्ग के 5, धमधा के 16 और पाटन के 8 विद्यालयों में एक-एक बालिका शौचालय का निर्माण किया जाएगा।
प्रत्येक शौचालय की स्वीकृत लागत ₹4.37 लाख है। इसमें ₹0.90 लाख स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) तथा ₹3.47 लाख विकसित भारत-जी राम जी योजना के अभिसरण से व्यय किए जाएंगे। प्रत्येक कार्य में ₹2.35 लाख सामग्री मद और 1.12 लाख मजदूरी मद के लिए निर्धारित हैं।
29 कार्यों के लिए स्वीकृत राशि में ₹26.10 लाख स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), ₹68.15 लाख सामग्री मद तथा ₹32.48 लाख मजदूरी मद शामिल हैं।
-रोजगार के साथ आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में कदम
विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराने के साथ ऐसी परिसंपत्तियों के निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है, जो भविष्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करें। जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका संवर्धन, जलवायु अनुकूल गतिविधियों और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से गांवों को अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे ने कहा कि समयबद्ध मजदूरी भुगतान, अधिक रोजगार दिवस और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण ग्रामीण परिवारों की आय एवं आजीविका को मजबूती प्रदान करेगा। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक सतत निगरानी की जा रही है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि योजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता अथवा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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