होम / सामाजिक गतिविधियां / दुर्ग रेलवे स्टेशन पर 'जनता खाना' गायब,वेंडर कर रहे गरीबों का शोषण - डॉ. प्रतीक उमरे
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दुर्ग। दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने दुर्ग रेलवे स्टेशन पर गरीब और सामान्य श्रेणी के यात्रियों के साथ हो रहे खुले धोखे और आर्थिक शोषण पर गहरी चिंता व्यक्त किया है।डॉ. प्रतीक उमरे ने रेल प्रशासन और आईआरसीटीसी के अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बैठे वेंडर और केटरिंग ठेकेदार मिलकर ठेंगा दिखा रहे हैं।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि रेलवे का स्पष्ट नियम है कि हर स्टेशन के खान-पान स्टाल पर आम और गरीब यात्रियों के लिए ₹20 वाला जनता खाना अनिवार्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए।परंतु दुर्ग रेलवे स्टेशन के स्टालों से यह जनता खाना पूरी तरह से नदारद है।जनरल डिब्बों में सफर करने वाले गरीब यात्रियों को मजबूरी में ₹20 की जगह ₹120 की महंगी थाली खरीदनी पड़ रही है,जो उनकी जेब पर सीधा डाका है।उन्होंने कहा कि जब भी बिलासपुर जोन या मंडल के उच्च अधिकारी निरीक्षण दौरे पर आते हैं, तो दिखावे के लिए स्टालों पर तुरंत जनता खाना सजा दिया जाता है।लेकिन जैसे ही अधिकारियों का दौरा खत्म होता है,यह किफायती खाना प्लेटफॉर्म से फिर गायब हो जाता है।वेंडर केवल तब पैकेट बाहर निकालते हैं जब कोई ट्रेन प्लेटफॉर्म पर खड़ी हो और चेकिंग का डर हो।आम दिनों में पूछने पर सीधे कह दिया जाता है कि 'जनता खाना खत्म हो गया है।उन्होंने कहा कि अधिक मुनाफे के चक्कर में गरीब यात्रियों के अधिकारों को कुचलने की इजाजत किसी भी वेंडर को नहीं दी जा सकती।नियमानुसार हर स्टॉल के डिस्प्ले बोर्ड पर 'जनता खाना' का नाम और उसकी कीमत स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए।लेकिन दुर्ग स्टेशन के स्टालों पर इसे जानबूझकर छिपाया जाता है ताकि यात्री भ्रमित रहें और मजबूरन महंगा खाना खरीदें।यह आईआरसीटीसी के नियमों का खुला उल्लंघन है।डॉ. प्रतीक उमरे ने दुर्ग स्टेशन प्रबंधन से मांग की है कि दुर्ग रेलवे स्टेशन के सभी फूड स्टालों की औचक जांच की जाए।जो वेंडर जनता खाना स्टॉक में नहीं रख रहे हैं या यात्रियों को मना कर रहे हैं,उन पर भारी जुर्माना लगाया जाए और बार-बार गलती करने पर उनका लाइसेंस रद्द किया जाए।
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