छत्तीसगढ़

बारिश से तरबतर दुर्ग… शिवनाथ नदी उफान पर… जलभराव और जानलेवा जोखिम के बाद भी नहीं पहुंची प्रशासन की टीमें

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दुर्ग शहर में बीते 8 घंटों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जि़ले में औसतन 29.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। हर वार्ड में जलभराव, बिजली के करंट की खतरे की खबरें आ रही हैं। जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है, लेकिन स्थिति की गंभीरता के बावजूद अब तक प्रशासनिक टीमें अधिकांश जगहों पर नहीं पहुँची हैं।

गंभीरता को देखते हुए पूर्व विधायक अरुण वोरा आज सुबह 6 बजे ही शहर के हालात का जायज़ा लेने के लिए स्वयं सड़कों पर उतरे। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय सहित शहर के कई जलभराव वाले क्षेत्रों का दौरा किया और स्कूल में भरे पानी की स्थिति पर चिंता जताई। वहाँ उपस्थित बच्चों से संवाद कर उन्हें पढ़ाया और उनका हालचाल जाना। इसके बाद वोरा ने शहर के विभिन्न मोहल्लों, मुख्य बाज़ारों और झुग्गी बस्तियों का दौरा कर स्थानीय लोगोंं से बातचीत की और प्रशासन को तत्काल राहत देने के निर्देश देने की मांग की। उन्होंने प्रशासन से विशेष रूप से झोपड़पट्टी इलाकों में राहत पहुंचाने और स्वास्थ्य टीमों की तैनाती की अपील की। उन्होंने कहा कि अब केवल निरीक्षण से नहीं, तुरंत कार्रवाई से ही लोगों को राहत मिलेगी।

शंकर नाला से बढ़ी मुसीबत

शहर के 11 वार्डों से होकर गुजरऩे वाला करीब 12 मीटर चौड़ा शंकर नाला पूरी तरह से भर चुका है, जिसके चलते शंकर नगर क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि घर-घर में 2-2 फीट तक पानी भर गया है। लोग अपने घर छोडऩे पर मजबूर हो गए हैं और सड़कों पर खड़े होकर मदद का इंतज़ार कर रहे हैं।

अधूरे कार्य पर उठाए सवाल

वोरा ने जानकारी दी कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में शंकर नाला सुधार योजना के लिए 18 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे, जिसमें से 12 करोड़ रुपए के कार्यों को पूरा भी किया गया। लेकिन इसके बाद बचा हुआ कार्य ठप पड़ गया और वर्तमान सरकार ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यदि यह कार्य पूर्ण हो जाता, तो आज यह जलभराव की स्थिति नहीं बनती।

महमरा के ऊपर 4 फीट पानी

शिवनाथ नदी में जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, क्योंकि मोंगरा जलाशय से 51,700 क्यूसेक, घुमरिया से 8,800 क्यूसेक और अन्य जल स्रोतों से 1,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे नदी के किनारे बसे क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा गहरा गया है। महमरा एनीकट का जलस्तर 4 फीट तक बढ़ चुका है और लगातार बढऩे की आशंका बनी हुई है।

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