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शुभ कार्य को कभी टालें नहीं, आत्मकल्याण का मार्ग साधना और तप से प्रशस्त होता है: मणिभद्र मुनि

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दुर्ग। जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब, दुर्ग में आयोजित आध्यात्मिक वर्षावास के अंतर्गत प्रतिदिन धर्मसभा में श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति के बीच राष्ट्र संत, नेपाल केसरी एवं मानव मिलन के संस्थापक पूज्य मणिभद्र मुनि महाराज ने भगवान महावीर की दिव्य वाणी का भावपूर्ण विवेचन करते हुए कहा कि भगवान की वाणी पवित्र, पावन और समस्त जीवों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाली होती है।
गुरुदेव ने कहा कि जड़ (शरीर) और चेतन (आत्मा) का संबंध अनादिकाल से चला आ रहा है। इस बंधन से मुक्त होकर आत्मा अपने शुद्ध, बुद्ध और दिव्य स्वरूप में तभी प्रकट हो सकती है, जब साधक सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र एवं सम्यक तप की आराधना करे। तप के महान अनुष्ठानों के माध्यम से कर्मबंधन क्षीण होते हैं और आत्मा मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होती है।
उन्होंने धर्म के दो स्वरूपों का सुंदर विवेचन करते हुए बताया कि साधु धर्म को अणगार धर्म तथा गृहस्थ धर्म को आगार धर्म कहा गया है। दोनों ही अपने-अपने स्थान पर आत्मकल्याण के सशक्त साधन हैं। जो व्यक्ति अपनी पात्रता और सामर्थ्य के अनुसार धर्म का पालन करता है, वह जीवन को सार्थक बना सकता है।
प्रवचन के दौरान गुरुदेव ने प्रेरणादायी संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य को शुभ कार्यों में कभी विलंब नहीं करना चाहिए। अक्सर जब मन में अच्छे विचार, श्रेष्ठ संकल्प या धर्मकार्य करने की प्रेरणा आती है, तो व्यक्ति उसे भविष्य के लिए टाल देता है या दूसरों की सलाह की प्रतीक्षा करता रहता है। परिणामस्वरूप वह शुभ अवसर निकल जाता है। इसके विपरीत जब अशुभ विचार आते हैं, तो उन्हें बिना सोचे-समझे तुरंत कार्यरूप दे देता है। इसलिए विवेकपूर्ण जीवन का यही संदेश है कि शुभ संकल्प को तत्काल कर्म में परिणत करें और अशुभ भावों को तत्काल त्याग दें।
जय आनंद मधुकर रतन भवन का वातावरण इन दिनों तप, त्याग, स्वाध्याय और साधना से अनुप्राणित है। श्रमण संघ परिवार के अनेक सदस्य विविध तपस्याओं एवं धार्मिक आराधनाओं में निरंतर संलग्न होकर आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हैं। धर्मसभा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर गुरुदेव की अमृतवाणी का श्रवण कर आत्मकल्याण की प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं। धर्म सभा को जेन संत पुनीत मुनि जी एवं साध्वी लक्ष्मी जी महाराज ने भी संबोधित किया। 
गुरुदेव के दर्शन बंदन के लिए देश के विभिन्न शहरों से प्रतिदिन श्रद्धालु एवं गुरु भक्त दुर्ग आ रहे हैं जिनके रहने एवं एवं गौतम प्रसादी की सुंदर व्यवस्था जय आनंद मधुकर रतन भवन की भोजनशाला में संचालित हो रही है।

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गुरु पूर्णिमा पर नयनदीप विद्या मंदिर के शिक्षकों का सम्मान, दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की प्रतिभा ने मोहा मनभिलाई। रोटरी चैरिटेबल ट्रस्ट भिलाई द्वारा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर नयनदीप विद्या मंदिर के शिक्षकों के सम्मान में एक गरिमामय समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला समन्वयक समग्र शिक्षा दुर्ग विनोद कुमार सिंह तथा विशिष्ट अतिथि पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी आशुतोष चावरे रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रोटरी चैरिटेबल ट्रस्ट भिलाई के अध्यक्ष सी.एस. बाजवा ने की। समारोह में संस्था के चेयरमैन एम.सी. जैन ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि रोटरी परिवार लंबे समय से दृष्टिबाधित बच्चों को आवासीय सुविधा एवं निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है और भविष्य में भी हर संभव सहयोग जारी रहेगा। संस्था के सचिव ज्ञानचंद जैन ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में ट्रस्ट के प्रबंध ट्रस्टी एवं रोटरी क्लब भिलाई स्टील सिटी के अध्यक्ष संतोष राय विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि विनोद कुमार सिंह ने दृष्टिबाधित बच्चों की प्रतिभा और विद्यालय की गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान बच्चों के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है। वहीं आशुतोष चावरे ने कहा कि नयनदीप विद्या मंदिर ब्रेल शिक्षा, संगीत, खेलकूद एवं संस्कारों के माध्यम से दृष्टिबाधित बच्चों के सर्वांगीण विकास का प्रेरणादायी कार्य कर रहा है। उन्होंने इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर बताया। अध्यक्षीय उद्बोधन में सी.एस. बाजवा ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से गुरुजनों के मार्गदर्शन का अनुसरण कर उज्ज्वल भविष्य बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर दृष्टिबाधित छात्र अनंत गुप्ता ने जल संरक्षण विषय पर तैयार अपना प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया, जिसकी अतिथियों ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। विद्यार्थियों ने लगभग डेढ़ घंटे तक भजन, गीत, कविता, भाषण एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में भूषण साहू एवं आयुष गुप्ता ने भजन, अनमोल चंद्राकर एवं काव्या ने
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