छत्तीसगढ़ में सरकारी धान भंडारण केंद्रों से करोड़ों रुपये के धान के गायब होने और इसकी जिम्मेदारी ‘चूहों’ पर डाले जाने के खिलाफ कांग्रेस ने मंगलवार को दुर्ग शहर में अनोखा विरोध दर्ज कराया जहां प्रतीकात्मक रूप से ‘चूहों की बारात’ निकाली गई। जिला कांग्रेस कमेटी, दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष राकेश ठाकुर के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक अरुण वोरा सहित जिलेभर से बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए।
इस अवसर पर अरुण वोरा ने मीडिया से संवाद करते हुए कहा कि—
छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन आज वही कटोरा करोड़ों के घोटाले से खाली किया जा रहा है। कबीरधाम जिले के बाजार चारभाठा और बरघरा संग्रहण केंद्रों से 26 हजार क्विंटल धान गायब होना, महासमुंद में 81 हजार क्विंटल से अधिक धान की कमी और बेमेतरा, जशपुर जैसे जिलों में करोड़ों की अनियमितताएँ—यह तर्क नहीं, बल्कि व्यवस्था पर लगा सबसे बड़ा तमाचा है।अगर सच में चूहे इतने ताकतवर हैं कि करोड़ों का सरकारी अनाज निगल जाएँ, तो फिर भंडारण व्यवस्था, निगरानी तंत्र और जिम्मेदार अफसर किस काम के हैं? धान की सुरक्षा के लिए मार्कफेड, वेयरहाउस कॉरपोरेशन और परिवहन व्यवस्था पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं।मैं स्वयं राज्य भंडार निगम का अध्यक्ष रह चुका हूँ और इतने बड़े स्तर पर धान की कमी को ‘चूहा थ्योरी’ से ढकने का प्रयास मैंने पहले कभी नहीं देखा। यह किसानों के हक और सरकारी धन की सीधी लूट है।
किसानों के पसीने की कमाई को इस तरह ‘चूहे’ बताकर गायब कर देना स्वीकार्य नहीं है। सरकार को मज़ाकिया बहानों के बजाय सच सामने लाना होगा और असली दोषियों को बेनकाब करना होगा।”
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