छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हाईकोर्ट में नई याचिका दाखिल की गई है। कांग्रेस की ओर से संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने यह याचिका लगाई है। जिसमें 11 से 14 मंत्री बनाए जाने पर आपत्ति जताई गई है इससे पहले भी इसी मामले में एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
इस पर सोमवार को सुनवाई होगी नियम के अनुसार प्रदेश में मंत्रियों की संख्या विधायकों की संख्या के 15% से ज्यादा नहीं हो सकती। 90 सीटों के हिसाब से इसका रेश्यो 13.5 आता है। इस आधार पर कांग्रेस विरोध कर रही है। वहीं भाजपा ने हरियाणा फॉर्मूले का हवाला दिया है।
दरअसल, संविधान के अनुच्छेद 164(1A) के अनुसार, किसी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा सदस्यों की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती। छत्तीसगढ़ में 90 विधायक हैं, इसलिए अधिकतम 13.5 यानी 13 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं। 14वें मंत्री की नियुक्ति इसी सीमा के उल्लंघन को लेकर विवाद में है।
सीटों की संख्या के 15% से ज्यादा नहीं हो सकते
विधानसभा में मंत्रिमंडल के सदस्य कुल सीटों की संख्या के 15% से ज्यादा नहीं हो सकते हैं। छत्तीसगढ़ में विधानसभा की 90 सीटें हैं। इस आधार पर मंत्रिमंडल का प्रतिशत 13.50 है।
छत्तीसगढ़ में 20 अगस्त को 3 नए मंत्रियों के शपथ के बाद मंत्रिमंडल की कुल संख्या 14 हो गई है, यह 15 प्रतिशत से ज्यादा है।
हरियाणा फॉर्मूले का हवाला
कांग्रेस इस आधार पर 14वें मंत्री की नियुक्ति का विरोध कर रही है। जबकि भाजपा इसे लेकर हरियाणा में लागू फॉर्मूले का हवाला दे रही है। हरियाणा में वर्तमान में 90 विधायक हैं और उसके अनुसार 13.5 विधायक मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं, उन्होंने मुख्यमंत्री सहित 14 मंत्रियों को कैबिनेट में जगह दी है।
कांग्रेस का कहना है कि यह संविधान के अनुच्छेद 164 (1क) का उल्लंघन है। अब इसे लेकर कांग्रेस के कार्यकर्ता बसदेव चक्रवर्ती ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई है। इस पर शुक्रवार को सुनवाई की संभावना है।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने उठाए थे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंत्रियों की संख्या 13 से बढ़ाकर 14 करने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा कि क्या केंद्र से 13 से 14 मंत्री करने की अनुमति मिल गई है। अगर अनुमति है तो यह अच्छी बात है, लेकिन अनुमति नहीं है तो 14 लोगों का मंत्रिमंडल असंवैधानिक है।
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