होम / दुर्ग - भिलाई / दिल्ली में सम्मानित हुई राव की कार्टून कला, मानद डॉक्टरेट के साथ दी सदस्यता
दुर्ग - भिलाई
भिलाई। प्रख्यात कार्टूनिस्ट और भिलाई स्टील प्लांट के पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक बी.वी. पांडुरंगा राव को नई दिल्ली स्थित विश्व संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण आयोग ने कार्टून कला और पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में प्रतिष्ठित मानद डॉक्टरेट प्रदान की गई है। यह सम्मान 17 अप्रैल को नई दिल्ली के ग्रीन लाउंज में आयोजित 9वें साहित्य सेवा पुरस्कार वितरण समारोह में प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता सुदेश बेरी ने दिया। उन्हें स्मृति चिन्ह, पदक और मानद डॉक्टरेट का प्रमाण पत्र देने के साथ ही विश्व संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण आयोग की सदस्यता का प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया। इस दौरान कार्टूनिस्ट राव ने मुख्य अतिथि अभिनेता सुदेश बेरी को ऑन-द-स्पॉट स्केच बनाकर भेंट किया। इस पर बेरी ने सुखद आश्चर्य के साथ उनका आभार जताया। यहां दर्शकों के बीच पांडुरंगा राव ने पर्यावरण, महिलाओं के अधिकारों और बच्चों की शिक्षा पर आधारित अपने कुछ जागरूकता कार्टून प्रदर्शित किए। वहीं उन्होंने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का हस्ताक्षरित 'कैरीकेचर' भी दिखाया। कार्यक्रम स्थल पर 7x4 फीट आकार का एक विशाल बैनर भी प्रदर्शित किया गया था, जिसमें पर्यावरण जागरूकता से जुड़े 35 कार्टूनों का एक अनूठा कोलाज बना हुआ था। वहां उन्होंने दुनिया की सबसे छोटी फ्लिप बुक भी दिखाई, जिसने विश्व रिकॉर्ड बनाया है।
बीएसपी से सेवानिवृत्ति के बाद बेंगलुरु में रह रहे 82 वर्षीय पांडुरंगा राव को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार, कार्टूनिंग के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान और पिछले 55 वर्षों से अपने विचारोत्तेजक कार्टूनों तथा अन्य विविध गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण जागरूकता फैलाने में दिए गए योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
उन्होंने देश के विभिन्न स्थानों पर 55 बार अपनी एकल कार्टून प्रदर्शनियों का आयोजन किया है। वहीं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कार्टून प्रतियोगिताओं में अनेक पुरस्कार जीते हैं। पर्यावरण जागरूकता से संबंधित उनके विभिन्न कार्यों और अन्य उपलब्धियों को 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स', 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' और विभिन्न 'विश्व रिकॉर्ड' में स्थान मिला है। श्री राव ने अपनी यह उपलब्धि भिलाई वासियों को समर्पित की है। श्री राव का मानना है कि भिलाई और भिलाई वासियों के प्रति वे हमेशा कृतज्ञ रहेंगे क्योंकि उनकी कार्टून कला को विकसित करने और राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भिलाई ने हमेशा प्रोत्साहित किया।
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