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ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्ती, देशभर में करोड़ों ई-चालान जारी

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देश में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई लगातार बढ़ रही है। ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग अब पारंपरिक जांच के साथ-साथ कैमरों, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम और ई-चालान जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके चलते नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों की पहचान पहले के मुकाबले तेजी से हो रही है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी 2019 से 31 दिसंबर 2023 के बीच देशभर में 18.24 करोड़ से अधिक ई-चालान जारी किए गए थे। इन चालानों से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 1.26 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। इससे पता चलता है कि डिजिटल ट्रैफिक निगरानी व्यवस्था का इस्तेमाल देश में बड़े स्तर पर किया जा रहा है।

2026 में भी ई-चालान और डिजिटल ट्रैफिक व्यवस्था का इस्तेमाल लगातार जारी है। कानून एवं न्याय मंत्रालय के अनुसार, 31 जनवरी 2026 तक देश में स्थापित 30 वर्चुअल कोर्ट में 10.13 करोड़ चालान प्राप्त हुए थे। इनमें से 9.05 करोड़ से अधिक चालानों का निपटारा किया जा चुका था। करीब 97.72 लाख चालानों का भुगतान हुआ और इससे 1,002.73 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई।

ई-चालान व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों की पहचान कैमरों और वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर की जा सकती है। कई शहरों में रेड लाइट जंप करने, निर्धारित गति से अधिक तेज वाहन चलाने, बिना हेलमेट बाइक चलाने, सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करने और गलत दिशा में वाहन चलाने जैसे मामलों में कैमरों के जरिए चालान भेजे जा रहे हैं।

दिल्ली जैसे बड़े शहरों में ट्रैफिक निगरानी के लिए बड़ी संख्या में कैमरे लगाए गए हैं। 2026 के शुरुआती महीनों में दिल्ली में भी लाखों ट्रैफिक चालान जारी किए गए। इनमें रेड लाइट उल्लंघन और तेज गति से वाहन चलाने के मामले प्रमुख रहे। तकनीक के जरिए कार्रवाई होने से पुलिसकर्मी की मौके पर मौजूदगी के बिना भी वाहन चालक के खिलाफ चालान जारी किया जा सकता है।

ई-चालान व्यवस्था के साथ वर्चुअल कोर्ट की भूमिका भी बढ़ी है। जिन मामलों में वाहन चालक चालान का भुगतान नहीं करता या मामला न्यायिक प्रक्रिया में जाता है, उन्हें संबंधित वर्चुअल कोर्ट में भेजा जा सकता है। इससे छोटे ट्रैफिक मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने में मदद मिल रही है और लोगों को हर मामले में अदालत में व्यक्तिगत रूप से जाने की जरूरत कम हो सकती है।

सरकार की ओर से डिजिटल ट्रैफिक व्यवस्था को बढ़ावा देने का एक प्रमुख उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना भी है। तेज रफ्तार, शराब पीकर वाहन चलाना, रेड लाइट तोड़ना और हेलमेट या सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करना सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख जोखिमों में शामिल हैं। ऐसे मामलों में लगातार निगरानी और कार्रवाई से वाहन चालकों को नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है।

वहीं, ई-चालान जारी होने के बाद वाहन मालिकों के लिए यह जरूरी है कि वे समय पर अपने चालान की स्थिति जांचें। कई मामलों में वाहन मालिक को मोबाइल मैसेज या अन्य डिजिटल माध्यम से चालान की जानकारी मिल सकती है। वाहन चालक आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने वाहन नंबर या चालान से जुड़ी जानकारी डालकर लंबित चालान की स्थिति देख सकते हैं।

ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर केवल आर्थिक जुर्माना ही नहीं, बल्कि कुछ मामलों में लाइसेंस से जुड़ी कार्रवाई या अन्य कानूनी प्रक्रिया भी हो सकती है। इसलिए वाहन चालकों को सड़क पर निर्धारित गति सीमा का पालन करना चाहिए, दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना चाहिए और कार में सीट बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए।

देश में बढ़ती डिजिटल निगरानी के बीच आने वाले समय में ट्रैफिक नियमों के पालन की निगरानी और अधिक तकनीक आधारित होने की संभावना है। कैमरा आधारित निगरानी, ई-चालान और वर्चुअल कोर्ट जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की प्रक्रिया पहले से ज्यादा डिजिटल हो रही है। ऐसे में वाहन चालकों के लिए ट्रैफिक नियमों का पालन करना और अपने वाहन से जुड़े दस्तावेजों को अपडेट रखना पहले से अधिक जरूरी हो गया है।

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