भारत में वोटर लिस्ट के सत्यापन और उसमें हुए बदलावों को लेकर चुनाव आयोग पर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े अपने सॉफ्टवेयर की समीक्षा के लिए एक कमेटी गठित करने का फैसला किया है। आयोग के मुताबिक, कमेटी यह जांच करेगी कि मतदाता सूची में बदलाव के लिए इस्तेमाल किया जा रहा सॉफ्टवेयर चुनावी कानूनों और तय नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं। कमेटी में एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी के साथ स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ को भी शामिल किया गया है।
यह मामला तब चर्चा में आया जब मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठे। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि वोटर लिस्ट में बदलाव से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया कानून के तहत की जा रही है और संस्थान के भीतर मतभेद होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया पिछले साल बिहार से शुरू हुई थी और बाद में देश के कई हिस्सों तक इसका विस्तार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नामों की दोबारा जांच की गई। चुनाव आयोग ने अब प्रक्रिया में कुछ बदलाव भी किए हैं। जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है, उनके घर जाकर दस्तावेजों की जांच करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।
इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों की ओर से प्रदर्शन भी किए गए हैं। सितंबर में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति भी बनी और पुलिस ने पानी की बौछार तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना चुनाव प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है। आयोग की ओर से अब सॉफ्टवेयर और सत्यापन प्रक्रिया की समीक्षा कराई जा रही है, ताकि मतदाता सूची में किसी भी तरह की तकनीकी या प्रक्रियागत समस्या की पहचान की जा सके। कमेटी की समीक्षा के बाद आगे की प्रक्रिया को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब देश में आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। ऐसे में मतदाता सूची की शुद्धता और सत्यापन प्रक्रिया राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। चुनाव आयोग की समीक्षा और आगे होने वाली कार्रवाई पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ मतदाताओं की भी नजर रहेगी।
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