होम / व्यापार / कौशल विकास से खुलेंगे रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की होगी महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करने और उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य सरकार कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप दक्ष बनाना सरकार की प्राथमिकता है। इससे न केवल युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को भी नई मजबूती मिलेगी।
इसी दिशा में प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम-सेतु) योजना के तहत प्रदेश के 30 शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को आधुनिक एवं उद्योगोन्मुखी कौशल विकास केंद्रों के रूप में विकसित करने की तैयारी है। योजना के अंतर्गत राज्य के छह क्लस्टरों में पांच वर्षों के दौरान लगभग 1,446 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में मंत्रालय महानदी भवन में दुर्ग और बस्तर क्लस्टर के लिए क्रमशः भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) और एनएमडीसी लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इन औद्योगिक संस्थानों की भागीदारी से आईटीआई में प्रशिक्षण को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाने और युवाओं को व्यावहारिक तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में कौशल विकास को रोजगार और औद्योगिक प्रगति से जोड़ने के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम-सेतु योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से आईटीआई को आधुनिक तकनीक, नवाचार, रोजगार और उद्यमिता के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों और निवेश के विस्तार के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन की मांग भी बढ़ रही है। राज्य सरकार का प्रयास है कि उद्योगों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल कर्मचारी प्रदेश में ही उपलब्ध हों और युवाओं को अपने हुनर के आधार पर बेहतर रोजगार मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में युवाओं को आधुनिक मशीनों, उपकरणों और औद्योगिक कार्यप्रणालियों का प्रशिक्षण देना आवश्यक है। उद्योगों की प्रत्यक्ष भागीदारी से प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर होगी और पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
भारत सरकार द्वारा शुरू की गई पीएम-सेतु योजना के अंतर्गत देशभर के एक हजार शासकीय आईटीआई को आधुनिक बनाने के लिए लगभग 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान किया गया है। योजना का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को वर्तमान और भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना, प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना और युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाना है।
छत्तीसगढ़ में इस योजना के क्रियान्वयन के लिए दुर्ग, कोरबा, सरगुजा, बस्तर, रायगढ़ और रायपुर सहित छह क्लस्टरों का चयन किया गया है। इनके अंतर्गत छह हब आईटीआई और 24 स्पोक आईटीआई को मिलाकर कुल 30 शासकीय आईटीआई का उन्नयन प्रस्तावित है।
योजना के तहत प्रत्येक क्लस्टर में लगभग 241 करोड़ रुपये और सभी छह क्लस्टरों में कुल लगभग 1,446 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसमें प्रत्येक हब आईटीआई के लिए 81 करोड़ रुपये तथा प्रत्येक स्पोक आईटीआई के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
वित्तीय भागीदारी के तहत केंद्र सरकार का हिस्सा 50 प्रतिशत, राज्य सरकार का 33 प्रतिशत और संबंधित उद्योग भागीदार का योगदान 17 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। इस राशि से आधुनिक मशीनें, तकनीकी उपकरण, प्रयोगशालाएं और प्रशिक्षण से जुड़ी अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
पीएम-सेतु योजना के अंतर्गत दुर्ग क्लस्टर में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की इकाई भिलाई स्टील प्लांट को एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में इस संबंध में एमओयू संपन्न हुआ।
इस क्लस्टर में शासकीय आईटीआई दुर्ग को हब संस्थान बनाया जाएगा। वहीं, शासकीय आईटीआई भिलाई, महिला आईटीआई भिलाई, राजनांदगांव और डौंडीलोहारा को स्पोक संस्थानों के रूप में शामिल किया गया है।
भिलाई स्टील प्लांट की औद्योगिक विशेषज्ञता और तकनीकी अनुभव से इन संस्थानों की प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी। विद्यार्थियों को आधुनिक औद्योगिक मशीनों, उत्पादन प्रक्रियाओं और कार्यप्रणालियों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
इस पहल से विद्यार्थियों को उद्योगों में उपयोग होने वाली तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी मिलेगी और वे रोजगार के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकेंगे।
बस्तर क्लस्टर में एनएमडीसी लिमिटेड को एंकर इंडस्ट्री पार्टनर बनाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में एनएमडीसी के साथ भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
इस क्लस्टर के अंतर्गत शासकीय आईटीआई बस्तर को हब आईटीआई के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ जगदलपुर, गीदम, कोंडागांव और नारायणपुर के शासकीय आईटीआई को स्पोक संस्थानों के रूप में शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर जैसे जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं तक गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। एनएमडीसी जैसे प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थान की भागीदारी से क्षेत्र के युवाओं को आधुनिक औद्योगिक कौशल सीखने के बेहतर अवसर मिलेंगे।
इससे बस्तर के युवा स्थानीय स्तर पर विकसित हो रही औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने के लिए भी तैयार हो सकेंगे।
पीएम-सेतु योजना के तहत सरगुजा क्लस्टर के लिए साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में भागीदारी की सहमति दी है। इस क्लस्टर के लिए टाटा आईआईएस का चयन ऑपरेटिंग पार्टनर के रूप में किया गया है।
एमओयू पर हस्ताक्षर की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है। साथ ही, समझौते के प्रारूप में आवश्यक संशोधन के लिए इसे एसईसीएल को भेजा गया है।
इसी प्रकार कोरबा क्लस्टर के लिए एनटीपीसी कोरबा ने एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में सहभागिता की सहमति प्रदान की है। इस क्लस्टर के लिए ऑपरेटिंग पार्टनर के चयन की प्रक्रिया जारी है।
रायपुर और रायगढ़ क्लस्टरों में एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के चयन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। इसके लिए राज्य के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के माध्यम से निविदाएं जारी की गई हैं।
रायपुर क्लस्टर के संबंध में हीरा ग्रुप की ओर से पूछे गए प्रश्नों का निराकरण किया जा चुका है। वहीं, रायगढ़ क्लस्टर के लिए एनटीपीसी लारा से संपर्क किया गया है। योजना में उसकी भागीदारी और क्रियान्वयन को लेकर प्रारंभिक चर्चा की जा रही है।
इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के साथ प्रदेश के सभी छह क्लस्टरों में योजना को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

पीएम-सेतु योजना में हब एवं स्पोक मॉडल के माध्यम से आईटीआई के बीच आधुनिक संसाधनों, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षण सुविधाओं का समन्वय स्थापित किया जाएगा।
हब आईटीआई को उन्नत प्रशिक्षण सुविधाओं और आधुनिक उपकरणों से युक्त प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। वहीं, इनसे जुड़े स्पोक आईटीआई भी उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञता का लाभ उठा सकेंगे।
इस व्यवस्था से अलग-अलग क्षेत्रों के युवाओं तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण की पहुंच बढ़ेगी। साथ ही, उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रमों में सुधार, प्रशिक्षकों के कौशल उन्नयन और विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
उद्योगों की प्रत्यक्ष सहभागिता से प्रशिक्षण और वास्तविक कार्यस्थल की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा। इससे प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी पाने के साथ स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर भी मिल सकेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, उद्योग और रोजगार को आपस में जोड़कर युवाओं के लिए अवसरों का मजबूत तंत्र तैयार कर रही है। औद्योगिक निवेश में वृद्धि के साथ यह जरूरी है कि प्रदेश के युवा भविष्य की तकनीकों और आधुनिक औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनें।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल रोजगार तलाशने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें अपने कौशल, प्रतिभा और नवाचार के माध्यम से रोजगार सृजित करने के लिए भी प्रोत्साहित करना है। कौशल विकास से रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खुलेंगे। इससे युवाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
रोजगार, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने भी पीएम-सेतु योजना को प्रदेश के युवाओं के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि आईटीआई के आधुनिकीकरण और उद्योगों की प्रत्यक्ष भागीदारी से युवाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक प्रशिक्षण मिलेगा। इससे उनके कौशल में वृद्धि होने के साथ रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के सचिव बसव राजू, संचालक हेमंत नंदनवार, एनएमडीसी के कार्यपालक निदेशक संजीव साही, सेल के पवन कुमार सहित संबंधित विभागों और औद्योगिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
पीएम-सेतु योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ में कौशल विकास की व्यवस्था को आधुनिक बनाने, उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इससे प्रदेश में तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक विकास के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है।
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