नई दिल्ली। दुनिया में पहली बार संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त इंटरनेशनल कॉफी डे के रूप में 1 अक्टूबर 2026 को मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 मार्च 2026 को एक प्रस्ताव पारित कर हर वर्ष 1 अक्टूबर को इंटरनेशनल कॉफी डे के रूप में मनाने का फैसला किया था। इस प्रस्ताव के पक्ष में 150 देशों ने मतदान किया, जबकि एक देश ने इसके खिलाफ वोट दिया और एक देश मतदान से अलग रहा। संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के अनुसार अमेरिका ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया, जबकि कनाडा ने मतदान में भाग नहीं लिया।
संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में कॉफी के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार कॉफी दुनिया के कई देशों में लाखों परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है और विकासशील देशों के लिए राजस्व का एक प्रमुख स्रोत भी है। कॉफी की खेती और प्रसंस्करण का संबंध गरीबी कम करने, रोजगार बढ़ाने, महिलाओं के सशक्तिकरण और टिकाऊ विकास जैसे लक्ष्यों से भी जोड़ा गया है।
इंटरनेशनल कॉफी डे को आधिकारिक संयुक्त राष्ट्र दिवस का दर्जा मिलने से पहले भी 1 अक्टूबर को कॉफी दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है। इंटरनेशनल कॉफी ऑर्गनाइजेशन के सदस्यों ने वर्ष 2014 में 1 अक्टूबर को साझा इंटरनेशनल कॉफी डे के रूप में मनाने पर सहमति जताई थी और पहला आयोजन 1 अक्टूबर 2015 को हुआ था। बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे आधिकारिक मान्यता प्रदान की।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इंटरनेशनल कॉफी डे का उद्देश्य कॉफी के महत्व और इससे जुड़े लोगों की भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इसमें खास तौर पर कॉफी उत्पादक किसानों, छोटे किसानों और पूरी कॉफी वैल्यू चेन से जुड़े लोगों की आजीविका, टिकाऊ उत्पादन और पर्यावरणीय प्रभाव जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की बात कही गई है।
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