होम / टेक्नोलॉजी / अंतरिक्ष में ही होगा डेटा प्रोसेसिंग, भारत का पहला ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट आज होगा लॉन्च
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भारत अंतरिक्ष और तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है। देश का पहला ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट आज लॉन्च किया जाएगा। हैदराबाद की स्पेस-टेक कंपनी TakeMe2Space अपने MOI-1A सैटेलाइट को SpaceX के Transporter-18 मिशन के जरिए अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी में है। इस मिशन की सबसे खास बात यह है कि सैटेलाइट अंतरिक्ष में रहते हुए ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से डेटा को प्रोसेस कर सकेगा।
आमतौर पर सैटेलाइट अंतरिक्ष से तस्वीरें और अन्य जरूरी डेटा इकट्ठा करके उसे धरती पर मौजूद ग्राउंड स्टेशन तक भेजते हैं। इसके बाद जमीन पर मौजूद कंप्यूटर और सर्वर उस डेटा का विश्लेषण करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में समय लगता है और बड़ी मात्रा में डेटा धरती तक भेजना पड़ता है। MOI-1A इसी प्रक्रिया को बदलने की कोशिश करेगा। सैटेलाइट में मौजूद कंप्यूटिंग सिस्टम अंतरिक्ष में ही डेटा का विश्लेषण करने में सक्षम होगा और जरूरत के मुताबिक केवल महत्वपूर्ण जानकारी धरती पर भेजी जा सकेगी।
MOI-1A में AI आधारित कंप्यूटिंग के लिए Nvidia Orin NX प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया है। इसके जरिए सैटेलाइट पृथ्वी की तस्वीरों और दूसरे डेटा का अंतरिक्ष में ही विश्लेषण कर सकेगा। इससे किसी इलाके में होने वाले बदलाव, कृषि से जुड़ी जानकारी, खनन गतिविधियों और अन्य महत्वपूर्ण चीजों की पहचान तेजी से की जा सकती है। कंपनी का कहना है कि इस तकनीक से डेटा को धरती तक भेजने की जरूरत कम होगी और महत्वपूर्ण जानकारी कम समय में हासिल की जा सकेगी।
इस तकनीक का इस्तेमाल खेती के क्षेत्र में फसलों की निगरानी और जमीन में होने वाले बदलावों को समझने के लिए किया जा सकता है। इसी तरह खनन क्षेत्रों में गतिविधियों की निगरानी, आपदा प्रबंधन में प्रभावित इलाकों की पहचान और मैपिंग जैसे कामों में भी ऑर्बिटल कंप्यूटिंग मददगार हो सकती है। बीमा और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भी सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा का तेजी से विश्लेषण किया जा सकता है।
TakeMe2Space के अनुसार, MOI-1A मिशन के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े ग्राहक भी जुड़े हुए हैं। कंपनी भविष्य में ऐसे कई सैटेलाइट का नेटवर्क तैयार करने की योजना पर काम कर रही है, जिनके जरिए अंतरिक्ष में ही बड़ी मात्रा में डेटा प्रोसेस किया जा सके। कंपनी का लक्ष्य अंतरिक्ष को केवल डेटा इकट्ठा करने वाली जगह के बजाय एक कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल करना है।
इस मिशन को भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई निजी कंपनियां सैटेलाइट, रॉकेट और स्पेस-टेक से जुड़ी तकनीकों पर काम कर रही हैं। MOI-1A मिशन के जरिए ऑर्बिटल कंप्यूटिंग जैसी नई तकनीक का व्यावहारिक परीक्षण किया जाएगा।
इसी Transporter-18 मिशन के जरिए Google भी अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग से जुड़े अपने प्रयोग के लिए एक प्रोटोटाइप सैटेलाइट भेजने की तैयारी कर रहा है। इससे पता चलता है कि अंतरिक्ष में ही AI और कंप्यूटिंग की क्षमता बढ़ाने को लेकर दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां भी तेजी से काम कर रही हैं।
MOI-1A का सफल लॉन्च और अंतरिक्ष में इसका प्रदर्शन भारत के स्पेस-टेक सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। अगर यह तकनीक सफल रहती है तो भविष्य में सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा को धरती पर भेजने से पहले ही अंतरिक्ष में उसका विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे डेटा ट्रांसफर का समय कम करने और जरूरी जानकारी तेजी से हासिल करने में मदद मिल सकती है। आने वाले समय में ऑर्बिटल कंप्यूटिंग का इस्तेमाल पृथ्वी की निगरानी, कृषि, मौसम, आपदा प्रबंधन, मैपिंग और कई अन्य क्षेत्रों में बढ़ सकता है।
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