प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर।
पुरुष प्रधान समाज में पत्नी के सम्मान और उसके जीवन के अनकहे संघर्षों को शब्दों में पिरोना आसान नहीं। लेकिन वरिष्ठ पत्रकार अशोक व्यास ने अपनी पुस्तक ‘एक पत्नी पर पुस्तक क्यों?’ के जरिए इसी अनछुए विषय को साहित्यिक अभिव्यक्ति दी है। उनकी इस कृति को छत्तीसगढ़ राज्य का पहला पुस्तक अवॉर्ड प्रदान किया गया। सोमवार, 2 नवंबर को बिलासपुर स्थित बुक्स क्लिनिक में आयोजित कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक अशोक व्यास को यह सम्मान दिया गया।
सम्मान प्रदान करते हुए बुक्स क्लिनिक के डायरेक्टर हितेश सिंह बिसेन ने कहा कि पत्नी पर पुस्तक लिखना अपने आप में एक अद्भुत और महत्वपूर्ण पहल है। पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने की बातें तो खूब होती हैं, लेकिन पत्नी के जीवन, योगदान और संघर्षों पर स्वतंत्र पुस्तक का अभाव इस सोच पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि यह पुस्तक किसी एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि मध्यमवर्गीय परिवारों की उन लाखों महिलाओं के जीवन का प्रतिबिंब है, जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में अनेक चुनौतियों और समस्याओं से जूझना पड़ता है।
पुस्तक का मूल संदेश है कि हर व्यक्ति को अपनी पत्नी का सम्मान क्यों करना चाहिए। इसकी केंद्रीय पात्र बबीता के जीवन-सफर के माध्यम से लेखक ने साहस, प्रेम, समर्पण, त्याग, अपनापन, संघर्ष, पारिवारिक रिश्तों, संस्कार, ज्ञान और आत्मविश्वास जैसे जीवन के अनेक पहलुओं को उकेरा है।
कृति में जिंदगी की खुशियों के साथ झगड़े, कठिनाइयां, डर, पीड़ा, प्रेरणा और सीखने की ललक भी शामिल है। यही विविध अनुभव इस पुस्तक को महज एक पारिवारिक कहानी से आगे ले जाकर रिश्तों की संवेदनशीलता और महिला के योगदान को समझने का माध्यम बनाते हैं।
दरअसल, पत्नी परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने सपनों, इच्छाओं और संघर्षों के साथ जिस तरह जीवन का सफर तय करती है, उसे अक्सर सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। ‘एक पत्नी पर पुस्तक क्यों?’ इसी अनदेखे पक्ष को सामने लाने का प्रयास है। यह कृति रिश्तों में सम्मान, बराबरी और साझेदारी की जरूरत को रेखांकित करती है।
कार्यक्रम में बुक्स क्लिनिक के मैनेजर पवन शर्मा, साक्षी व्यास, रजनी केशरवानी, पल्लवी पाण्डेय, राजेश कुमार बंजारे, कलप सिंह, आशीष धुरी, लव थवाईत, गीतेश प्रकाश, भूमिका साहू, रोशनी मसीह, दिव्या सिंगरौल, मानसी पटेल, ओजस वस्त्राकर, अनुराग रजक, भूमिका राठौर और नीलम विंध्यराज सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
पत्नी पर पुस्तक लिखना केवल साहित्यिक प्रयोग नहीं, बल्कि उस सामाजिक सोच को आईना दिखाने की पहल है, जिसमें महिलाओं के त्याग और योगदान को अक्सर उनका कर्तव्य मानकर भुला दिया जाता है। रिश्तों में सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि व्यवहार और बराबरी के अधिकार से दिखाई देना चाहिए।
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