प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/रायगढ़ – बिलासपुर।
रायगढ़। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी के विकास कार्यों को लेकर कांग्रेस नेता अनिल शुक्ला की ओर से उठाए गए सवालों पर भाजपा महिला मोर्चा की महामंत्री रेखा महमिया ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कांग्रेस को विज्ञप्तियों तक सीमित विपक्ष बताते हुए कहा कि जिस पार्टी को जनता ने लगभग 65 हजार वोटों के अंतर से पराजित किया, उसके नेताओं को पहले आत्ममंथन करना चाहिए, फिर विकास पर सवाल उठाना चाहिए।
रेखा महमिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को भाजपा सरकार के ढाई साल के कामकाज का हिसाब तो चाहिए, लेकिन अपने पांच साल के कार्यकाल का हिसाब देने से वह बचती रही है। उन्होंने सवाल किया कि भूपेश बघेल सरकार के दौरान रायगढ़ में शिक्षा, खेल, सड़क और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में कौन से ऐसे बड़े काम किए गए, जिनका ठोस उदाहरण जनता के सामने रखा जा सके?
महमिया ने ओपी चौधरी की कार्यशैली का बचाव करते हुए कहा कि वे सुबह से देर रात तक जनता के बीच रहकर विकास कार्यों की निगरानी करते हैं। कांग्रेस नेताओं को केवल अखबारों में बयान जारी करने के बजाय सड़क पर उतरकर निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए।
उन्होंने नालंदा परिसर, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, रिंग रोड, इतवारी बाजार का सिंदूर पार्क, पहाड़ मंदिर पर्यटन विकास, कोतरा रोड ऑक्सीजन पार्क, रामलीला मैदान, भूतबंधान तालाब का उन्नयन और जिला चिकित्सालय में सुविधाओं के विस्तार जैसे कार्यों का उल्लेख किया। इसके अलावा प्रयास महाविद्यालय, बीएड कॉलेज, खेल मैदानों में क्रिकेट और बैडमिंटन नेट की व्यवस्था तथा प्राकृतिक चिकित्सा की शुरुआत को भी ओपी चौधरी के कार्यकाल की उपलब्धियां बताया।
रिंग रोड और बायपास को लेकर उठ रहे सवालों पर भाजपा ने कांग्रेस के पिछले कार्यकाल को कठघरे में खड़ा किया। रेखा महमिया के अनुसार, कांग्रेस सरकार अपने पांच वर्षों में रिंग रोड की डीपीआर तक तैयार नहीं करा सकी, जबकि वर्तमान सरकार ने इसके लिए 400 करोड़ रुपये की स्वीकृति दिलाई है।
उन्होंने दावा किया कि 29.99 करोड़ रुपये के केलो रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट को भी स्वीकृति मिली है। वहीं, लोहरसिंह में लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत वाले स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य शुरू होने की बात कही। भाजपा नेत्री ने इन परियोजनाओं को ओपी चौधरी के विकास विजन का प्रमाण बताया।
रोजगार के सवाल पर महमिया ने दावा किया कि 4800 मेगावाट के पावर हब और नए उद्योगों के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पीएससी भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों का हवाला देते हुए विपक्ष पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।
हालांकि, रोजगार संबंधी दावों का वास्तविक मूल्यांकन तभी संभव है, जब नए उद्योगों में स्थानीय युवाओं की नियुक्तियों, उपलब्ध पदों और वास्तविक रोजगार के आंकड़े सार्वजनिक हों।
रेखा महमिया ने कांग्रेस के वोट चोरी संबंधी आरोपों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष को गंभीर आपत्ति है, तो उसे अपने चुनावी परिणामों और निर्वाचित विधायकों के संदर्भ में भी समान कसौटी अपनानी चाहिए।
उनका कहना हैं कि चुनाव जीतने पर लोकतंत्र की जीत और हारने पर वोट चोरी का आरोप लगाने की राजनीति उचित नहीं है। उन्होंने वर्ष 2018 में भूपेश बघेल के नेतृत्व में बनी कांग्रेस सरकार और वर्तमान में कांग्रेस के निर्वाचित विधायकों का उल्लेख करते हुए विपक्ष से अपने आरोपों पर स्पष्टता मांगी।
हालांकि, चुनावी अनियमितताओं से जुड़े किसी भी आरोप का समाधान राजनीतिक कटाक्ष से नहीं, बल्कि तथ्यों और संवैधानिक संस्थाओं की जांच से होना चाहिए।
महमिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को रायगढ़ में हो रहे विकास कार्य दिखाई नहीं दे रहे और वह धार्मिक-सामाजिक आयोजनों तक पर राजनीतिक सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को रामचरितमानस भेंट करने जैसे कार्यक्रमों पर भी आपत्ति जताना विपक्ष की नकारात्मक राजनीति को दर्शाता है।
उन्होंने दोहराया कि रायगढ़ की जनता ने ओपी चौधरी को बड़े जनादेश के साथ चुना है और विपक्ष को जनादेश का सम्मान करते हुए रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को अहंकार छोड़कर विकास कार्यों को देखने और सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने की सलाह दी।
रेखा महमिया का बयान भाजपा की ओर से कांग्रेस के आरोपों का राजनीतिक जवाब जरूर है, लेकिन रायगढ़ की असली तस्वीर न तो केवल भाजपा की उपलब्धियों की सूची से तय होगी और न ही कांग्रेस की आलोचनाओं से।
विकास का मूल्यांकन भाषणों, विज्ञप्तियों और चुनावी आंकड़ों से नहीं, बल्कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और नागरिक सुविधाओं में आए वास्तविक बदलाव से होना चाहिए। किसी परियोजना की घोषणा या स्वीकृति महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन उसका समय पर पूरा होना और जनता को उसका लाभ मिलना उससे भी अधिक जरूरी है।
1. यदि रिंग रोड के लिए 400 करोड़ रुपये की स्वीकृति हुई है, तो भूमि अधिग्रहण, निर्माण की समयसीमा और वर्तमान प्रगति की स्थिति क्या है?
2. 29.99 करोड़ रुपये के केलो रिवरफ्रंट और लगभग 100 करोड़ रुपये के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की परियोजनाओं में अब तक कितना काम पूरा हुआ है?
3. 4800 मेगावाट के पावर हब और नए उद्योगों से अब तक कितने स्थानीय युवाओं को वास्तविक रोजगार मिला है?
4. कांग्रेस यदि अपने पांच साल के कार्यकाल का संतोषजनक हिसाब नहीं दे पाई, तो क्या इससे वर्तमान सरकार के हर विकास संबंधी दावे स्वतः सही साबित हो जाते हैं?
5. क्या भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने कार्यकाल का परियोजनावार, खर्चवार और समयसीमावार सार्वजनिक रिपोर्ट कार्ड जारी करने का साहस दिखाएंगे?
निष्कर्ष
65 हजार वोटों की जीत राजनीतिक ताकत और जनसमर्थन का प्रमाण हो सकती है, लेकिन वह विकास के हर दावे का स्थायी प्रमाणपत्र नहीं है। इसी तरह विपक्ष का काम सवाल उठाना है, लेकिन सवालों के साथ तथ्य और विकल्प देना भी उसकी जिम्मेदारी है।
रायगढ़ की जनता को न विज्ञप्तियों का शोर चाहिए, न आरोपों की सियासत। उसे चाहिए समय पर पूरे होते विकास कार्य, पारदर्शी खर्च, बेहतर सुविधाएं और रोजगार के ठोस अवसर।
संपादकीय टिप्पणी: लोकतंत्र में सत्ता का अहंकार और विपक्ष की नकारात्मकता, दोनों जनहित के लिए नुकसानदेह हैं। जनादेश सरकार को काम करने का अधिकार देता है, सवालों से छूट नहीं; और विपक्ष को सवाल उठाने का अधिकार देता है, तथ्यों से बचने की छूट नहीं।
सत्ता के दावे हों या विपक्ष के सवाल, दोनों की कसौटी एक ही होनी चाहिए—बयान नहीं, प्रमाण; प्रचार नहीं, जमीन पर परिणाम।
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