बिलासपुर… नगर निगम में सरकारी सामानों के रखरखाव और हिसाब-किताब को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पहले काउ कैचर, जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली के गायब होने की जानकारी सामने आने के बाद अब जलप्रदाय व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाले 15 मोटर-पंपों का हिसाब नहीं मिल रहा है। निगम के जोन क्रमांक-02 के आधिकारिक नोटिस में खुद इस गड़बड़ी का उल्लेख है। इससे निगम की संपत्तियों की निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।
नगर निगम के जोन क्रमांक-02 कार्यालय, तिफरा से 28 सितंबर 2026 को जारी नोटिस के मुताबिक, जनवरी 2026 से अब तक जलप्रदाय शाखा के लिए 75 मोटर-पंप स्थापित करने के उद्देश्य से दिए गए थे। इनमें से 60 मोटर-पंप मरम्मत के लिए जोन क्रमांक-02 के भंडारण कक्ष में वापस जमा किए गए हैं, लेकिन शेष 15 मोटर-पंपों की जानकारी उपलब्ध नहीं है। जोन कमिश्नर ने संबंधित सुपरवाइजर रवि सूर्यवंशी को पत्र प्राप्त होने के तीन दिन के भीतर इन पंपों की जानकारी अधोहस्ताक्षरी के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
नोटिस जारी, लेकिन पंप कहां गए?
निगम के अपने दस्तावेज में 15 मोटर-पंपों का हिसाब नहीं मिलने की बात दर्ज होना मामूली प्रशासनिक चूक मानकर टालने का विषय नहीं है। सवाल है कि जलप्रदाय जैसी जरूरी सेवा के लिए जारी किए गए इन उपकरणों का रिकॉर्ड कहां है? क्या ये पंप कहीं इस्तेमाल हो रहे हैं, मरम्मत के लिए भेजे गए हैं या फिर इनके रखरखाव और वापसी का हिसाब ही नहीं रखा गया? इन सवालों का जवाब संबंधित शाखा की जांच और दस्तावेजों से ही सामने आएगा। फिलहाल निगम के नोटिस में शेष पंपों की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
पहले भी उठे थे महंगे उपकरणों के गायब होने के सवाल
नगर निगम में सामानों के गायब होने का यह पहला मामला नहीं बताया जा रहा है। करीब एक साल पहले काउ कैचर, जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली के गायब होने को लेकर भी सवाल उठे थे। उस समय मामले की जांच होने की बात सामने आई थी, लेकिन अब तक की कार्रवाई और जांच के अंतिम नतीजों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। आरोप है कि तत्कालीन कमिश्नर के जाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। हालांकि, इस पुराने प्रकरण में किसकी जिम्मेदारी तय हुई और क्या कार्रवाई हुई, इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
अब 15 मोटर-पंपों का हिसाब नहीं मिलने से पुराने मामले की जांच और मौजूदा प्रकरण की जवाबदेही, दोनों पर ध्यान जाना स्वाभाविक है। यदि सरकारी संसाधनों के आवंटन, उपयोग, मरम्मत और वापसी का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाता, तो इतनी बड़ी संख्या में उपकरणों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए नोटिस जारी करने की नौबत क्यों आती?
जोन कमिश्नर ने मांगा जवाब, जांच के नतीजे का इंतजार
इस मामले में जोन कमिश्नर से बातचीत करने का प्रयास किया गया, लेकिन व्यस्तता के कारण उनका पक्ष नहीं मिल सका। हालांकि, जारी नोटिस से यह स्पष्ट है कि कार्यालय ने संबंधित सुपरवाइजर से जवाब तलब किया है। अब देखना होगा कि तीन दिन की समय-सीमा में 15 मोटर-पंपों के संबंध में क्या जानकारी दी जाती है और निगम प्रशासन उनकी वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए आगे क्या कदम उठाता है।
नगर निगम की संपत्ति जनता के पैसे से खरीदी जाती है। ऐसे में 15 मोटर-पंपों का हिसाब नहीं मिलना केवल रिकॉर्ड दुरुस्त करने का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों की निगरानी से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि पंप कहां हैं, उनका रिकॉर्ड किसके पास था और यदि लापरवाही हुई है तो उसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।
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