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सामाजिक गतिविधियां
रिटायर होने के बाद संविदा पर जमे हैं तत्कालीन अधिकारी, तत्काल सेवा समाप्त करने की मांग
श्री दिग्विजय क्लब का मामला
राजनांदगांव। कलेक्टर की अनुमति के बिना जारी श्री दिग्विजय क्लब की अनुज्ञा के निरस्त होने के बाद अब नगर निगम के तत्कालीन अधिकारी जिन्होंने अनुज्ञा जारी की थी, उन पर कार्रवाई की मांग हो रही है। नगर निगम के ये तत्कालीन कार्यपालन अभियंता सेवानिवृत्त होने के बाद फिर से संविदा पर काम कर रहे हैं।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार नजूल शहर राजनांदगांव के मोहल्ला टांकापारा स्थित शीट क्रमांक 47-ए, भूखंड क्रमांक 4/1, क्षेत्रफल 4945.00 वर्गमीटर भूमि, जो कि ‘श्री दिग्विजय क्लब राजनांदगांव’ (अध्यक्ष कलेक्टर राजनांदगांव पदेन सचिव) की होल्डरशीप में दर्ज है, पर भवन निर्माण हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। इस मामले में मनमाने तरीके से कार्रवाई करते हुए तत्कालीन भवन अनुज्ञा अधिकारी द्वारा बिना कलेक्टर कार्यालय की अनुमति/अनापत्ति के ही 28 अप्रैल 2023 को भवन अनुज्ञा (क्रमांक 11835) जारी कर दी गई थी।
शिकायत मिलने पर जब फाइल (नस्ती) का प्रारंभिक परीक्षण किया गया, तो यह पोल खुली कि इस पूरी प्रक्रिया में कलेक्टर की अनिवार्य अनुमति को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया था। इसके बाद निगम आयुक्त ने कड़ा कदम उठाते हुए आदेश जारी किया कि आवेदक 7 दिवस के भीतर कलेक्टर कार्यालय की अनुमति प्रस्तुत करे, अन्यथा अनुज्ञा को निरस्त करते हुए किए गए अवैध निर्माण को तोड़ा जाएगा और उसका पूरा खर्च भू-राजस्व के बकाया की तरह वसूला जाएगा।
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल उन जिम्मेदार अधिकारियों पर उठ रहा है जिन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर या गंभीर लापरवाही बरतते हुए बिना उच्चाधिकारी (कलेक्टर) की अनुमति के संवेदनशील शासकीय नजूल भूमि पर भवन अनुज्ञा की फाइल पास कर दी।
सूत्रों और दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े और प्रक्रियागत त्रुटि के पीछे तत्कालीन समय में जिम्मेदार रहे अधिकारी (कार्यपालन अभियंता) की मुख्य संलिप्तता बताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि गंभीर प्रशासनिक चूक और अनियमितता को अंजाम देने वाले ये अफसर अब सेवानिवृत्त (रिटायर) होने के बावजूद वर्तमान में संविदा आधार पर नगर पालिक निगम राजनांदगांव में ही मलाईदार पदों पर जमे हुए हैं।
स्थानीय नागरिकों, बुद्धिजीवियों और विभिन्न संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मांग की है कि जिस अधिकारी के कार्यकाल और लापरवाही के कारण यह अवैध अनुज्ञा जारी हुई और निगम की छवि धूमिल हुई, वे अब रिटायरमेंट के बाद संविदा पर निगम में मजे ले रहे हैं, उनकी संविदा सेवा को तत्काल समाप्त किया जाए।
इस पूरे मामले में संलिप्त अन्य मैदानी कर्मचारियों, उप इंजीनियरों और आर्किटेक्ट की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ता जितेन्द्र जैन ने भी संबंधित अधिकारी की सेवा समाप्त करने और कार्रवाई की मांग की है।
श्री दिग्विजय क्लब जैसी प्रतिष्ठित संस्था और शासकीय भूमि से जुड़े इस मामले में प्रशासनिक सुस्ती और मिलीभगत ने कई गंभीर संकेत दिए हैं। अब देखना यह होगा कि नगर निगम प्रशासन इस मामले में केवल नोटिस जारी कर खानापूर्ति करता है या फिर लापरवाही बरतने वाले संविदा अधिकारी पर कड़ा चाबुक चलाता है।
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