होम / सामाजिक गतिविधियां / शासन के आदेश पर कार्रवाई में दोहरा रवैया क्यों? वेतन के लिए तरस रहे नगरीय निकायों के अधिकारी-कर्मचारी
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दुर्ग/रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन भुगतान का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। शासन द्वारा प्रत्येक माह की 1 तारीख को वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए जाने के बावजूद कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय बन गया है। वहीं, कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई से संबंधित आदेश जारी होने पर तत्काल कार्रवाई किए जाने और कर्मचारियों के हितों से जुड़े आदेशों के पालन में देरी होने को लेकर नवयुक्त अधिकारी कर्मचारी कल्याण संघ, छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय ने कड़ी आपत्ति जताई है।
*शासनादेश का पालन सुनिश्चित करने की मांग*
संघ ने अपने पत्र में छत्तीसगढ़ शासन, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के पत्र क्रमांक एफ 4-16/2009/18, दिनांक 10 अक्टूबर 2024 का उल्लेख किया है। इस आदेश के माध्यम से नगरीय निकायों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतन भुगतान की निर्धारित तारीख 7 से बदलकर प्रत्येक माह की 1 तारीख की गई थी।
इसके बावजूद नगरीय निकायों में समय पर वेतन भुगतान नहीं होने की स्थिति पर सवाल उठाते हुए संघ ने पूछा है कि जब शासन के निर्देशों का पालन करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, तो कर्मचारियों को उनके वेतन के लिए इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?
*कार्रवाई के आदेशों पर तत्परता, वेतन के मामले में देरी क्यों?*
संघ ने अपनी आपत्ति में कहा है कि जब किसी अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई से संबंधित आदेश जारी होता है, तब उसका तत्काल क्रियान्वयन किया जाता है। लेकिन जब मामला कर्मचारियों के वेतन भुगतान, लंबित सेवा लाभ, चिकित्सा सुविधाओं और पुरानी पेंशन योजना जैसी मांगों से जुड़ा होता है, तब निर्णय एवं भुगतान में देरी देखने को मिलती है।
संघ का सवाल है कि शासन के आदेशों के पालन में यह विरोधाभासी स्थिति क्यों? यदि प्रशासनिक आदेशों का पालन अनिवार्य है, तो कर्मचारियों के हित में जारी निर्देशों का भी समान गंभीरता से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
संघ ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के हितों से जुड़े शासनादेशों की अनदेखी से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता है और उनके परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
*दीपावली से पहले लंबित वेतन भुगतान की मांग*
नवयुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ (छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय) के प्रांतीय अध्यक्ष राजेश सोनी द्वारा दिनांक 23 अक्टूबर 2026 को उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मंत्री श्री अरुण साव को सौंपे गए पत्र में दीपावली से पहले नगरीय निकायों के कर्मचारियों का लंबित वेतन भुगतान कराने की मांग की गई है।
पत्र में संघ ने उल्लेख किया है कि उसके अनुसार छत्तीसगढ़ के लगभग 80 प्रतिशत नगरीय निकायों में कर्मचारियों का एक से तीन माह तक का वेतन लंबित है। दीपावली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार से पहले वेतन भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों के परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। संघ ने शासन से सभी नगरीय निकायों को लंबित वेतन भुगतान के लिए आवश्यक राशि आवंटित करने की मांग की है।
*प्रधानमंत्री को भी भेजा गया ज्ञापन*
संघ द्वारा दिनांक 23 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र भेजकर नगरीय निकायों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के नियमित वेतन भुगतान, पुरानी पेंशन योजना, चिकित्सा सुविधाओं तथा लंबित सेवा लाभों के संबंध में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है।
पत्र में छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 58 तथा छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 86 का उल्लेख करते हुए लागू सेवा शर्तों के अनुसार देय वेतन एवं अन्य लाभों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
*संघ ने जताई कड़ी आपत्ति*
नवयुक्त अधिकारी कर्मचारी कल्याण संघ ने कहा कि अधिकारी-कर्मचारी नगरीय निकायों में सफाई, जलप्रदाय, विद्युत व्यवस्था, राजस्व संग्रहण, वाहन संचालन और अन्य नागरिक सेवाओं का संचालन करते हैं। वे अपनी जिम्मेदारियों का नियमित निर्वहन करते हैं, इसलिए उनके वेतन और अन्य देय लाभों का भुगतान समय पर होना चाहिए।
संघ ने शासन एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि प्रत्येक माह की 1 तारीख को वेतन भुगतान संबंधी आदेश का प्रभावी पालन कराया जाए, लंबित वेतन एवं सेवा लाभों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा आदेशों के पालन में होने वाली देरी के कारणों की समीक्षा कर जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।
संघ का स्पष्ट संदेश है कि शासन के आदेशों का पालन सभी मामलों में समान गंभीरता से होना चाहिए। कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई संबंधी आदेशों पर जिस तत्परता से अमल किया जाता है, उसी तत्परता से कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, चिकित्सा सुविधा एवं अन्य वैधानिक सेवा लाभों से जुड़े आदेशों का भी पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
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