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बच्चों की पढ़ाई गई तेल लेने, नेतागिरी का स्कूल चला रहे गुरुजी? सिस्टम की चुप्पी पर सवाल

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बिलासपुर..शिक्षा विभाग में एक शिक्षक एलबी की प्रतिनियुक्ति, कार्यालयीन भूमिका, ऑनलाइन उपस्थिति और सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। नियमित अध्यापन के बजाय कार्यालयीन गतिविधियों में संलग्नता, प्रतिनियुक्ति में कथित राजनीतिक अनुशंसा और आरटीआई आवेदनों पर जानकारी लंबित रहने जैसे मुद्दों पर विभागीय स्थिति स्पष्ट नहीं है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सहित अन्य माध्यमों से शिकायत किए जाने की जानकारी के बीच सवाल है कि जांच कहां तक पहुंची और जवाबदेही किसकी है?

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अध्यापन की जिम्मेदारी, भूमिका पर सवाल

संबंधित शिक्षक की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल है कि वे नियमित अध्यापन के बजाय कार्यालयीन गतिविधियों में किस आधार पर संलग्न रहे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वे पहले जनपद पंचायत में मध्यान्ह भोजन के टोकन संबंधी काम देखते थे। उनकी पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति की पात्रता और वर्तमान पदस्थापना के आधार पर भी स्पष्टता जरूरी है।

प्रतिनियुक्ति में विधायक की अनुशंसा की भूमिका होने की बात सामने आई है। विभाग को बताना चाहिए कि आदेश किस नियम के तहत जारी हुआ, पात्रता की जांच किसने की और कार्यालयीन दायित्व सौंपने का आधार क्या था। अनुशंसा नियमों का विकल्प नहीं हो सकती।

ऑनलाइन हाजिरी और अधिकार किसके?

संबंधित शिक्षक की ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर भी सवाल हैं। क्या उनकी हाजिरी निर्धारित व्यवस्था के अनुसार दर्ज हो रही है? यदि कोई छूट दी गई है, तो उसका लिखित आदेश क्या है?

नेहरू नगर स्थित कार्यालय में उनकी भूमिका भी स्पष्ट होनी चाहिए। प्राचार्यों को निर्देश देने और कार्यालयीन कामकाज में हस्तक्षेप के आरोपों की पुष्टि संबंधित आदेशों से होनी चाहिए। एक महिला कर्मचारी के लंबे अवकाश और कार्यालयीन उपस्थिति से जुड़े सवालों की जांच भी उपस्थिति पंजी, अवकाश स्वीकृति और अन्य अभिलेखों के आधार पर की जा सकती है।

आरटीआई में सूचना लंबित, जवाबदेही किसकी?

सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी पर कार्रवाई इस मामले का अहम पहलू है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ आवेदनों पर निर्धारित समय में सूचना नहीं मिलने, प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश के बाद भी जानकारी लंबित रहने और मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचने की बात सामने आई है। इसकी स्थिति संबंधित आवेदन, अपीलीय आदेश और आयोग के अभिलेखों से स्पष्ट हो सकती है।

आवेदकों ने यह भी सवाल उठाया है कि सूचना मांगने पर उनसे उनके काम और निवास के बारे में पूछताछ की जाती है। इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। मूल सवाल यह है कि मांगी गई सूचना नियमानुसार उपलब्ध कराई गई या नहीं। सूचना के अधिकार में जवाबदेही का आधार दस्तावेज होने चाहिए, आवेदक की निजी जानकारी नहीं।

शिकायतों के बाद कार्रवाई कहां?

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सहित अन्य माध्यमों से शिकायत किए जाने की जानकारी है, लेकिन जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है। शिकायत अपने आप में आरोपों का प्रमाण नहीं होती, लेकिन उसका निष्पक्ष परीक्षण और परिणाम बताना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

राजनीतिक संपर्क अपने आप में अनियमितता नहीं है। लेकिन यदि प्रतिनियुक्ति या कार्यालयीन कामकाज में नियमों से हटकर सुविधा दिए

जाने की शिकायत है, तो उसकी जांच अभिलेखों के आधार पर होनी चाहिए।

रसूख बड़ा या नियम?

प्रतिनियुक्ति आदेश, पदोन्नति संबंधी अभिलेख, ऑनलाइन उपस्थिति और आरटीआई प्रकरण की स्थिति स्पष्ट करना संबंधित विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है। दस्तावेज नियमसम्मत प्रक्रिया की पुष्टि करते हैं तो स्थिति साफ होनी चाहिए; अनियमितता मिलने पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

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