चक्रवात अर्नब के प्रभाव से जिले में हो रही भारी बारिश के बीच किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजे के लिए समय पर सूचना देने की सलाह दी गई है। कृषि विभाग के अनुसार, बीमित फसल को स्थानीय आपदा या कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी फसल को नुकसान होने पर किसानों को 72 घंटे के भीतर सूचना देना अनिवार्य है। समय पर सूचना मिलने से नुकसान के आकलन और बीमा दावा प्रक्रिया में मदद मिलेगी।भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से जिले में अधिकांश स्थानों पर भारी वर्षा होने की जानकारी दी गई है। असामयिक बारिश से फसलों को नुकसान की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि नुकसान होने पर इंतजार न करें और निर्धारित समय सीमा में सूचना दर्ज कराएं।
उपसंचालक कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, किसान फसल नुकसान की सूचना इन माध्यमों से दे सकते हैं।
0 टोल-फ्री हेल्पलाइन: 14447 पर कॉल करें।
0 व्हाट्सएप: 7065514447 पर नुकसान का विवरण भेजें।
0 ऑनलाइन शिकायत: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आधिकारिक पोर्टल pmfby.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
0 क्रॉप इंश्योरेंस ऐप: गूगल प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड कर फसल नुकसान का विवरण दर्ज करें।
0 क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, राजस्व विभाग, संबंधित बैंक या बीमा कंपनी को निर्धारित समय सीमा में सूचना दें।
0 किसान शिकायत दर्ज करते समय बीमित फसल, नुकसान की स्थिति और प्रभावित खेत का विवरण तैयार रखें। शिकायत या सूचना दर्ज करने का प्रमाण सुरक्षित रखना भी उपयोगी होगा।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2026 के लिए जिले में धान (सिंचित एवं असिंचित), मक्का, सोयाबीन, तुअर (अरहर), मूंग, उड़द, मूंगफली, कोदो, कुटकी और रागी अधिसूचित फसलें हैं।
योजना में प्रतिकूल मौसम के कारण फसल की बुवाई या रोपाई नहीं हो पाने, ओलावृष्टि और जलप्लावन जैसी स्थानीयकृत आपदाओं तथा कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी फसल को होने वाली कुछ निर्धारित क्षतियों के लिए प्रावधान हैं। स्थानीय आपदा और कटाई के बाद खेत में सुखाने रखी फसल को नुकसान होने पर नियमानुसार अंतरिम राहत का प्रावधान भी है।
हालांकि, धान की फसल में जलप्लावन से होने वाली क्षति को स्थानीयकृत आपदा के इस प्रावधान में शामिल नहीं किया गया है। मुआवजे की पात्रता नुकसान के प्रकार, बीमा शर्तों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तय होगी।
कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि चक्रवात के प्रभाव से अत्यधिक बारिश के कारण यदि उनकी बीमित फसल को नुकसान हुआ है, तो वे तत्काल संबंधित माध्यम से सूचना दर्ज कराएं। निर्धारित समय सीमा का पालन करने से सर्वेक्षण और बीमा दावा प्रक्रिया समय पर पूरी करने में मदद मिल सकती है।
Copyright 2024-25 Public Bhadash - All Rights Reserved
Powered By Global Infotech.